महानतम् साइंटिस्ट निकोला टेस्ला का भगवान में विश्वास, स्वयं के विचार, ओर विज्ञान के लेकर सोच के विषय में आज हम उनकी जीवनी के माध्यम से जानेगें । विचार और विश्वास प्रयोगात्मक और सैद्धांतिक भौतिकी :- टेस्ला छोटे उप-परमाणु( इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन ....) कणों से बने परमाणुओं के सिद्धांत से असहमत थे , जिसमें उनका मानना था कि विद्युत आवेश पैदा करने वाले इलेक्ट्रॉन जैसी कोई चीज नहीं थी । उनका मानना था कि यदि इलेक्ट्रॉनों का अस्तित्व था, तो वे पदार्थ की चौथी अवस्था या "उप-परमाणु" थे जो केवल एक प्रायोगिक निर्वात में मौजूद हो सकते थे और उनका बिजली से कोई लेना-देना नहीं था। टेस्ला का मानना था कि परमाणु अपरिवर्तनीय हैं - वे किसी भी तरह से स्थिति को बदल नहीं सकते हैं या विभाजित नहीं हो सकते हैं। वह 19वीं सदी की एक सर्व-व्यापक ईथर की अवधारणा में विश्वास करते थे जो विद्युत ऊर्जा का संचार करती है। टेस्ला आमतौर पर पदार्थ के ऊर्जा में रूपांतरण के...
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